Tuesday, July 26, 2016

कहानी का एक हिस्सा ..

कहानी का एक हिस्सा 


अपना काम छोड़कर वह अपने घर चले गए। उन्हें जानकर यह ख़ुशी हुई कि  यह यहा की परम्परा का हिस्सा है. सामने से आते हुए प्रकाश से बचने के लिए उन्होंने उची दीवार की आड़ ले ली। यह बात आई और गयी, किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. पगडण्डी तो नहीं सकते पर उसे सड़क भी तो नहीं कहा जा सकता है. वह उन्हीं  रास्तों  से भटकते हुए उस तालाब के पास पंहुचा। ठंडे  पानी के साथ आकाश को निहारते हुए उसे वह पुराना दौर याद आया।  तालाब उसके लिए इंसाइक्लोपीडिया से  कम  नहीं होता  था। बचपन की कितनी यादे  पुराने तहखाने से निकल कर सतह पर आने लगी थी. वह उन यादों  में कुछ पल के लिए खो गया।  जाने -अनजाने वह उस अतीत का हमसफ़र बन गया। यहाँ से उसकी नई  कहानी शुरू होती है. यहीं  तालाब के किनारे नरम नरम हरी दूब पर लेटे  हुए उसने अपने भविष्य की योजना बनाई। आकाश में चील  को उड़ते देखते हुए उसके सपनो के भी पंख लग गए। उसने सोच लिया था कि  उसे क्या  करना है।  

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