कुछ रह जाता है ..
कभी - कभी ऐसा होता है,
लिखने का मन नहीं करता है.
तब भी..
आप विचार शून्य नहीं होते हैं,
लेकिन
लिखना नहीं चाहते हैं.
सबके साथ होता है
जीवन में
हर बार ..
कुछ बच सा जाता है
जो लिखा जा सकता था.
कहने और समझने की
कोई सीमा
हो ही नहीं सकती
कोशिश ..
तो करनी ही पड़ेगी
अन्तर्मन में ..
जाना ही पड़ेगा ..
वहां की आवाज को
बाहर लाकर ..
खूब ध्यान से सुनो
जीवन की
असली सच्चाई को जानो
उस आवाज से दोस्ती करो
उसे ही अपनी पहचान बनाओ
उसे पहचान बनाने के बाद
नहीं रह जाएगी
किसी अन्य की जरूरत
महाशून्य की तलाश..
पूरी हो जाएगी..
संगीतमय हो जायेगा पूरा जगत
प्रकाशित हो जायेगा
हर कोना
उसके पास जल्दी जाओ
तभी जान पाओगे कि
सच वास्तव में कैसा होता है ..