Monday, February 28, 2011

corruption

कल शाम रामबहादुर राय की स्पीच सुनी. उन्होने भ्रष्टाचार पर बहुत बाते बताई. १९९१मे चन्द्रशेखर और मोहन धारिया के एक फ़ोन का हवाला देते हुए उस समय के प्रधानमन्त्री के आर्थिक सलाहकार मनमोहन सिंह को उन्होने जब बेईमान कहा तो स्रोताओ ने बहुत देर तक ताली बजाई . आज राय साहब पूरे लय मे थे. उनको बहुत दिनो के बाद बनारस मे सुनना बहुत अच्छा लगा. खामियो पर बोलते हुए कहा कि ये संविधान ठीक नही है, इसे बदल देना चाहिए. इसमे गान्धी के हिन्द स्वराज की मूल आत्मा कही नही है.उन्होने अम्बेडकर को कोड करते हुए कहाँ कि अम्बेडकर ने कहा था कि जब इसे जलाना होगा, उसमे सबसे पहले मेरा नाम होगा. जिस संविधान मे गाव और परिवार कि बात नही है, वह देश का विकास कभी नही कर सकता. उन्होने भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतर आने और नए "संविधान सभा" के गठन के वास्ते छात्रो और शिक्षको का अह्वाहन करते हुए "जय - हिन्द" कह्कर अपनी बात समाप्त की.