सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव प्रधानमंत्री बनने के लिए जी तोड़ मेहनत करने की सलाह अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओ को दे रहे है. एक बात समझने की है कि मुलायम सिंह अगर देश के प्रधानमंत्री बन जाते है तो उससे देश क़ा क्या भला होगा ?
अपने पिछले शासन-काल में जब ये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो पुलिस भर्ती क़ा जबरदस्त घोटाला सामने आया था. यूपी के विकास कि तस्वीर तो इन्होने बदली नहीं, लेकिन एक बात निश्चित कर दी कि इनके परिवार के सभी लोग सांसद, मंत्री और विधायक तो बन ही जाए.
अभी प्रदेश में इनकी ही सरकार है, विकास क़ा कोई माडल तो दिखा नहीं, उलटे सड़कों कि स्थिति और ख़राब हो गयी और बिजली कब आएगी पता नहीं. दफ्तरों के छोटे मोटे भ्रष्टाचार, शिक्षा कि स्थिति, शासन व्यवस्था रोजगार, सब वैसे के वैसे ही है. , जब इनकी पार्टी और सरकार प्रदेश की स्थिति को बढ़ियाँ नहीं कर सकती है, तो देश क़ा क्या होगा..,
भगवान् ही मालिक है... अच्छा तो यह होता कि यूपी को विकास कि राह पर ले जाते और इस विकास के वास्ते आप देश कि बागडोर सँभालने क़ा स्वप्न देखते.. जिस तरह से राष्ट्रपति चुनाव में सपा ने कांग्रेस क़ा साथ दिया, वह सबको मालूम है. यूपी को केंद्र से करीब ५० हजार करोड़ क़ा अतिरिक्त धन आवंटित किया जायेगा..वास्तव में ये सब अगर विकास में ख्रर्च हो तो इससे प्रदेश कि कुछ तस्वीर तो बदलेगी, पर ऐसा होना नामुमकिन दीखता है.
पुरे प्रदेश में आप घूम कर आ जाइये, कोई यह कहते हुए नहीं मिलेगा कि ये सरकार यूपी को तरक्की के राह पर ले जाएगी.किसी को यह कहना एक स्वप्न कि तरह लगता है.लोगो क़ा ऐसा सोचना जायज भी है. अभी तक किसी राजनितिक पार्टी ने जनता के विश्वाश को बढ़ाया नहीं है, बल्कि उलटे उसके विश्वाश पर कुठाराघात ही किया है.
आम लोग कहते है कि ये सब अपनी तिजोरी भरने में लगे हुए है. जनता कि सुध किसे है. लेकिन अब यह कहने से काम नहीं चलेगा. जनता को सारे सवालो को पूछना पड़ेगा, इसका उत्तर भी उन्हें मिलना चाहिए.
अपने पिछले शासन-काल में जब ये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो पुलिस भर्ती क़ा जबरदस्त घोटाला सामने आया था. यूपी के विकास कि तस्वीर तो इन्होने बदली नहीं, लेकिन एक बात निश्चित कर दी कि इनके परिवार के सभी लोग सांसद, मंत्री और विधायक तो बन ही जाए.
अभी प्रदेश में इनकी ही सरकार है, विकास क़ा कोई माडल तो दिखा नहीं, उलटे सड़कों कि स्थिति और ख़राब हो गयी और बिजली कब आएगी पता नहीं. दफ्तरों के छोटे मोटे भ्रष्टाचार, शिक्षा कि स्थिति, शासन व्यवस्था रोजगार, सब वैसे के वैसे ही है. , जब इनकी पार्टी और सरकार प्रदेश की स्थिति को बढ़ियाँ नहीं कर सकती है, तो देश क़ा क्या होगा..,
भगवान् ही मालिक है... अच्छा तो यह होता कि यूपी को विकास कि राह पर ले जाते और इस विकास के वास्ते आप देश कि बागडोर सँभालने क़ा स्वप्न देखते.. जिस तरह से राष्ट्रपति चुनाव में सपा ने कांग्रेस क़ा साथ दिया, वह सबको मालूम है. यूपी को केंद्र से करीब ५० हजार करोड़ क़ा अतिरिक्त धन आवंटित किया जायेगा..वास्तव में ये सब अगर विकास में ख्रर्च हो तो इससे प्रदेश कि कुछ तस्वीर तो बदलेगी, पर ऐसा होना नामुमकिन दीखता है.
पुरे प्रदेश में आप घूम कर आ जाइये, कोई यह कहते हुए नहीं मिलेगा कि ये सरकार यूपी को तरक्की के राह पर ले जाएगी.किसी को यह कहना एक स्वप्न कि तरह लगता है.लोगो क़ा ऐसा सोचना जायज भी है. अभी तक किसी राजनितिक पार्टी ने जनता के विश्वाश को बढ़ाया नहीं है, बल्कि उलटे उसके विश्वाश पर कुठाराघात ही किया है.
आम लोग कहते है कि ये सब अपनी तिजोरी भरने में लगे हुए है. जनता कि सुध किसे है. लेकिन अब यह कहने से काम नहीं चलेगा. जनता को सारे सवालो को पूछना पड़ेगा, इसका उत्तर भी उन्हें मिलना चाहिए.
सतीश कुमार सिंह
वाराणसी